स्किजोफ्रेनिया - Kumar Surendra

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Tuesday, 17 July 2018

स्किजोफ्रेनिया



    स्किजोफ्रेनिया



    स्किजोफ्रेनिया नामक मनोरोग करीब 1 प्रतिशत व्यस्क में पाया जाता है| इस बीमारी के मुख्य लक्षण निम्नांकित हैं‌-

  • ·          बीमारी की शुरुआत 15 वर्ष से 35 वर्ष की आयु के मध्य सर्वाधिक होती है | रोगी धीरे-धीरे अन्तर्मुखी होकर समाज से दूर रहने लगता है तथा अकान्त पसन्द करता है|
  • ·          रोगी के व्यक्तित्व में परिवर्तन आ जाती है तथा उसकी इच्छा समय से स्नान करना, दाढ़ी या बाल कटवाने तथा सजनें-सवरने की नहीं करती है|
  • ·          कुछ रोगियों को तरह-तरह की काल्पनिक आवाजें सुनाई देती हैं जो उसे डराती-धमकाती हैं या फिर उसके क्रियाकलाप पर लगातार टिप्पणी करती हैं| मरीज इन आवाजों को वास्तविक समझता है|
  • ·          ऐसे रोगी को अपने काम या अध्ययन के प्रति भी रुचि नहीं रह जाती हैं|
  • ·          कुछ रोगियों को ऐसा अनुभव होता है कि बाहरी शक्तियाँ उसके मन- मस्तिष्क तथा शरीर पर अवांछ्नीय तरीके से प्रभाव डाल रही हैं| जैसे रोगी यह कह सकता है कि उसके मस्तिष्क की बातें उसकी अपनी नही हैं, बल्कि किसी अन्य व्यकित द्वारा उसके मस्तिष्क में जादू-मंत्र या उपकरण के माध्यम से प्रवेश करायी गयी है|
  • ·          कुछ रोगी यह विश्वास करते हैं कि उनके मस्तिष्क में किसी ने ट्रांसमीटर लगा दिया है, जिसके द्वारा उसके मन की बातें सारे विश्व में-टेलीविजन तथा रेडियो के माध्यम से प्रसारित की जा रही है| 
  • ·          रोगी कभी-कभी अपनी पत्नी या पति के चरित्र पर अविश्वास करने लगते हैं, उन्हे ऐसा भी मिथ्या विश्वास हो जाता है कि उसके परिजन उसे जान से मारने की नियत से उसके खाने में विष मिला रहे हैं|
  • कैटाटोनिक स्किज़ोफ्रेनिया का रोगी अकारण ही उत्तेजित रहता है ऐसे रोगी भोजन व पानी का त्याग कर देते हैं, तथा एक ही मुद्रा में मूर्तिवत घंटों खड़े रहते हैं| ये कभी-कभी अपने कपड़ों में ही मल-मूत्र कर देते हैं|
    स्किजोफ्रेनिया के कारण -
यह एक अनुवांशिक बीमारी है| रोगी के जीवन में आए विकृतियों के कारण उनके मस्तिष्क के रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है|



    स्किजोफ्रेनिया के उपचार-

चूँकि यह रोग मुख्य रूप से मस्तिष्क के रसायनों में आये विकृतियों के कारण होता है इसलिये इसका उपचार भी मुख्यता औषधियों से ही होता ह, इन औषधियों को एंटीसाइकोटिक कहते हैं| क्लोरप्रोमाजिन, हैलोपेरिडाल इत्यादि दवाएँ इस रोग के उपचार हेतु 1952 से ही उपलब्ध हैं|
        रेसपेरिडॉन, औलेन्जापिन तथा क्लोजापिन इत्यादि नयी औषधियाँ हैं जो अत्यंत लाभदायक हैं| पहली बार रोगी पहली बार रोग होने पर रोगी को करीब 6 माह तक दवा लेनी पड़ती है परंतु यदि रोग बार-बार होता रहता है तो देर तक औषधियों का सेवन करना पड़ सकता है इन दवाओं से लगभग 80% रोगी ठीक हो जाते हैं| परन्तु ध्यान दें कि दवा समय से पूर्व बन्द करते ही रोग दुबारा बढ़ जाता है ऐसे रोगी स्वयं दवा नही खाते हैं, क्योंकि ये अपनी बीमारी स्वीकार नही करते हैं| इसलिये मरीज को नियमित दवा खिलाने की जिम्मेदारी पूर्णतया परिजनों की हो जाती है| कैटाटोनिक स्किजोफ्रेनिया की ई0सी0टी0 इक कारगर चिकित्सा है|

     स्किजोफ्रेनिया व विवाह-
ऐसे रोगी की शादी की जाए अथवा नहीं यह प्रश्न पराया किया जाता है मैं इस विषय में तथ्य आपके सामने रख देता हूं शादी की जाए अथवा नहीं इस के निर्णय का दायित्व आपका होगा 

विवाह से संबंधित हानियां-
  • विवाह होने ना होने से रोक पर कोई असर नहीं पड़ता सिर्फ विवाह हो जाने से रोगी ठीक नहीं हो जाता है
  • ·          स्किजोफ्रेनिया के कुछ रोगी जीविकोपार्जन में अक्षम होते हैं पति पत्नी और बच्चे के देखरेख का बोझ भी परिजनों पर आ सकता है
  • ·          क्योंकि यह अनुवांशिक बीमारी है इसके बच्चों को भी रोग की संभावना होती है परंतु माता या पिता में से यदि कोई एक इस बीमारी से ग्रस्त है तो उनके बच्चों में किस रोग की संभावना 10% होती है तथा 90% आशा है कि उनके बच्चा स्वस्थ होगा
·          विवाह से लाभ-

  •     इन रोगियों की कामेच्छा भी अन्य व्यक्तियों जैसी ही होती है अतः विवाह की आवश्यकता इन्हें भी होती है
  • आवश्यकता इन रोगियों को भी होती है समय पर औषधि दे देते रहने पर बहुत सारे रोगी लगभग सामान्य जीवन जीते हैं




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