फोबिया - Kumar Surendra

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Thursday, 19 July 2018

फोबिया


किसी भी वस्तु, व्यक्ति, स्थान अथवा परिस्थितियों के प्रति अत्यधिक का कारण एवं असंगत भय को फोबिया कहते हैं
 फोबिया के रोगियों को अपने भय के अतार्किकता का पूर्ण ज्ञान भी रहता है अर्थात रोगी यह अच्छी तरह से जानता है कि मुझे इस वस्तु से इतना भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है फिर भी वह अपने भय को नियंत्रण नहीं कर पाता है अतः वह उस वस्तु, व्यक्ति, स्थान अथवा परिस्थिति से भागने की कोशिश करता है|

फोबिया निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-
  
  •  साधारण फोबिया-

साधारण फोबिया के रोगी किसी एक या दो वस्तु, स्थान अथवा परिस्थिति से अत्यधिक भयभीत रहते हैं एवं उससे दूर रहने का प्रयास करते हैं|  जैसे- जानवरों का भय, अंधकार का भय आकाशीय बिजली का भय इत्यादि अधिकांश ऐसे व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करती है इस तरह का फोबिया पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा पाया जाता है|
  •        सोशल (सामाजिक) फोबिया-


सोशल फोबिया नामक रोग में व्यक्त सामाजिक स्थितियों से भयभीत रहता है उसे ऐसा महसूस होता है कि प्रत्येक व्यक्ति उसकी क्रिया-कलापों पर ध्यान दे रहे हैं तथा कटाक्ष करते हैं जबकि रोगी को अंदर से यह ज्ञान होता है कि वास्तव में यह सच नहीं है रोगी अपने को ऐसी परिस्थिति में अटपटा सा महसूस करता है तथा प्रत्येक सामाजिक अवसर से बचने की कोशिश करता है सोशल फोबिया से ग्रसित व्यक्ति अपनी प्रतिभाओं का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता अधिकांश ऐसे रोगी समाज के शिकार भी होते हैं रोग के कारण समाज से अलग हो जाने तथा अवसाद ग्रसित हो करीब 15% रोगी आत्महत्या भी कर लेते हैं|   


  •  अगोरा फोबिया-

 इस रोग से ग्रसित व्यक्ति एक ही साथ बहुत सारे भयों से पीड़ित रहता है जैसे ऐसे रोगियों को अकेले बंद कमरे में रहने का भय लगता है ऐसे रोगी किसी भीड़ भरे स्थान, सिनेमाहाल, ट्रेन में यात्रा करने, या लिफ्ट में चढ़ने से भी डरते हैं इसमें से कुछ रोगियों में शरीर के विभिन्न अंगों में काल्पनिक रोगों का भय सताता है इस रोग का मूल कारण पैनिक के दौरान होते हैं पैनिक डिसऑर्डर में रोगी को अचानक तथा अकारण ही तीव्र भय का दौरा पड़ता है उसका दिल बहुत तेज से धड़कने लगता है उसे घबराहट होती है तथा साँस रुकने का अनुभव होता है, हाथ पांव में कंपन होने लगता है तथा पसीना होता है पैनिक का दौरा लगभग कुछ मिनटों से कुछ घंटों के बाद स्वयं ही समाप्त हो जाता है परंतु दौरे की आशंका से रोगी फिर भी भयभीत रहता है इन रोगियों में पैनिक का दौरा जिन परिस्थितियों में पढ़ता है रोगी उन परिस्थिति को ही अपने दौरे का कारण मान लेता है अतः उस परिस्थिति से दूर रहने का प्रयास करता है अधिकांश ऐसे रोगी के साथ अगर सहायता के लिए एक बच्चा भी उपलब्ध हो तो वह अपने को सुरक्षित एवं आश्वस्त महसूस करते हैं, सोशल फोबिया की तरह अगोरा फोबिया के रोगियों का भी अवसादग्रस्त होने की संभावना ज्यादा होती है|

कारण-

 साधारण फोबिया प्रकृति द्वारा प्रदत्त सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया का स्वीकृत रूप है अधिकांश ऐसे भय प्रकृति ने बाल्य अवस्था में व्यक्ति की रक्षा के लिए बनाए हैं जैसे बच्चा अनजान व्यक्ति, अंधकार, तेज आवाज, जानवरों से संभवत डरता है किशोरावस्था तक लड़कों एवं लड़कियों दोनों में इस तरह का भय समान रूप से पाए जाते हैं परंतु किशोरावस्था के बाद अधिकांश लड़के इन भयों से मुक्त हो जाते हैं परंतु लड़कियों मे यह भय बने रहते हैं जिसका एक कारण सामाजिक उपेक्षा एवं पालन पोषण के तरीके का प्रभाव भी हो सकता है सोशल फोबिया एवं अगोरा फोबिया मूलतः मस्तिष्क में रासायनिक विकारों के परिणाम स्वरुप होता है

उपचार-


 साधारण फोबिया के उपचारों में दवाओं की कोई विशेष भूमिका नहीं होती है ऐसे रोगियों के लिए व्यवहार चिकित्सा सर्वोत्तम होती है सोशल फोबिया एवं अगोरा फोबिया में रोगियों को पहले दवाएं दी जाती हैं साथ ही साथ व्यवहार चिकित्सा द्वारा इन्हें अपने भयों पर नियंत्रण करने की कला सिखाई जाती है व्यवहार चिकित्सा से रोगियों को प्राणायाम एवं अन्य विधियों द्वारा अपने मन मस्तिष्क को शांति तथा नियंत्रित करना सिखाया जाता है भय को दूर करने का सर्वोत्तम उपाय उसका सामना करना होता है ना कि उसे भागना |  भागकर हम थोड़ी देर के लिए अपने को भयमुक्त कर सकते हैं परंतु या स्थाई हल नहीं है जब भी फिर उस वस्तु से सामना होता है हम पुनः भयभीत हो जाते हैं व्यवहार चिकित्सा में रोगियों को भय पैदा करने वाली वस्तुओं एवं परिस्थितियों की एक सूची तैयार करने को कहा जाता है इसमें से जो वस्तु या प्रस्तुतियां जो सबसे कम है भय पैदा करती हैं उसका सामना करने को प्रोत्साहित किया जाता है अगर व्यक्ति ऐसे में तनाव ग्रस्त हो जाता है तो उसे पहले सिखाएंगे तनावमुक्त के तरीके से अपने तनाव को दूर करने को कहा जाता है एक भय को जीतने के उपरांत, उससे बड़े भाई को जीतने की कोशिश करता है लगन से करने पर अधिकांश रोगी धीरे-धीरे अपने सभी भयों पर काबू पा लेता है




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